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नारनौल के साहित्यकार-कवि

नारनौल के लेखक, कवि, साहित्यकार 

नारनौल साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों की भूमि है| यहाँ पैदा हुए संत कवि नित्यानंद और अनेक लोककवियों के अलावा यहाँ हिंदी के अनेक रचनाकार हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नगर का नाम रोशन किया है| इनमें महाकवि पुरुषोत्तम दास निर्मल और दोहाकार रघुविन्द्र यादव का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है|   

1. स्वर्गीय महाकवि पुरुषोत्तम दास निर्मल
    6 महाकाव्य, एक दोहा संग्रह सहित लगभग एक दर्जन कृतियों के  रचनाकार
2. डॉ सत्यवीर मानव
    लघुकथा, बालगीत, गीतिका संग्रह सहित लगभग एक दर्जन कृतियाँ प्रकाशित
3. रघुविन्द्र यादव
   चार  दोहा संग्रह, दो लघुकथा संग्रह, दो कुंडलिया छंद संग्रह, एक ग़ज़ल संग्रह, एक कविता संग्रह सहित कुल 25 कृतियाँ प्रकाशित| हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा 2021 का लाला देशबंधु गुप्त सम्मान (राशि 2.5 लाख) प्रदान किया जा चुका है| 
4. स्व. डॉ जे.एस. यादव 
    दो काव्य कृतियों के अलावा गद्य पुस्तकों के रचनाकार
5. राजेश प्रभाकर
    एक चेहरा कविता संग्रह के रचनाकार
6. डॉ.सुशील 'शीलू'
   लघुकथा और छन्दमुक कविता की चार कृतियाँ और एक शोधप्रबंध प्रकाशित|
7. जयप्रकाश कौशिक
   एक कविता संग्रह प्रकाशित
8. डॉ.शिवताज सिंह
   एक कृति प्रकाशित
9. सुनील पागल 
   दो कविता संग्रह के रचनाकार 
10. महेश गौतम
11. बाबूलाल तोंदवाल
12. हजारीलाल महावर
13. डॉ महिपाल सिंह
14. स्वर्गीय दयालदास गाँधी
15. जगदीश शर्मा

मूलतः नारनौल के रहने वाले और बाहर बस गए साहित्यकार 

1. हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा 
2. सरदार मनजीत सिंह 
3. श्रीमती कृष्णलता यादव 
4. हरीन्द्र यादव
5. रामनिवास 'मानव'

मिलिए आधुनिक कबीर रघुविन्द्र यादव से

आधुनिक कबीर-रघुविन्द्र यादव 

क्यों कहते हैं रघुविंद्र यादव को आधुनिक कबीर  

आधुनिक कबीर के दोहे/आज के दोहे/ कलयुग के दोहे/ आज अगर कबीर जिन्दा होते तो ये होते आज के दोहे| नयी सदी के दोहे/ लोकप्रिय दोहे| 
उपरोक्त शीर्षकों से आपने नीचे दिए दोहे सोशल मीडिया (फेसबुक, whatsapp, ब्लोगस्पॉट, ट्विटर आदि) पर खूब पढ़े होंगे| पढ़कर मन में कभी यह जिज्ञासा भी उठी होगी कि यह आधुनिक कबीर अथवा इन दोहों का लेखक कौन है| तो आज हम आपका परिचय उस कलमकार से करवा रहे हैं, जिसने इन दोहों की रचना की है| 
अगर आप हरियाणा से हैं तो गर्व कर सकते हैं कि यह रचनाकार आपके ही प्रदेश का प्रमुख दोहाकार है और यदि आप नारनौल या महेंद्रगढ़ के हैं तो सीना चौड़ा करके कह सकते हैं कि यह आधुनिक कबीर हमारे ही नगर का वरिष्ठ साहित्यकार है| 
इन दोहों के रचियता नारनौल के वरिष्ठ साहित्यकार श्री रघुविन्द्र यादव हैं| जो हरियाणा प्रदेश ही नहीं देश के जानेमाने दोहाकार हैं| आपकी अब तक दोहे की चार पुस्तकें "नागफनी के फूल" और "वक्त करेगा फैसला" "आये याद कबीर" और "देख समय का फेर" सहित कुल 25 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं| नीचे दिए दोहे उनकी पुस्तक नागफनी के फूल में वर्ष 2011 में प्रकाशित हुए थे| जो सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय हुए हैं और अब तक कई लाख लोग शेयर और कॉपी पेस्ट कर चुके हैं| इस पुस्तक की कीमत मात्र 100 रूपये है और इसमे 424 दोहे हैं|
आपकी दूसरी कृति "वक़्त करेगा फैसला" में भी बहुत धारदार 666 दोहे हैं| इसके भी बहुत से दोहे सोशल मीडिया में बेहद लोकप्रिय हैं| इसकी कीमत 200 रूपये है| 
श्री यादव शोध और साहित्यिक की राष्ट्रीय पत्रिका "बाबूजी का भारतमित्र" और वेब मैगज़ीन "विविधा" के संपादक हैं और महेंद्रगढ़ में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं| इतना ही नहीं आप जाने माने पर्यावरण कार्यकर्ता भी हैं और आजकल राष्ट्रीय जल बिरादरी की अरावली भू-सांस्कृतिक इकाई के समन्वयक और नागरिक चेतना मंच के अध्यक्ष भी हैं| 


नई सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात 
बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात !!

अब तो अपना खून भी, करने लगा कमाल 
बोझ समझ माँ बाप को, घर से रहा निकाल !!

पानी आँखों का मरा, मरी शर्म औ' लाज 
कहे बहू अब सास से, घर में मेरा राज !!

भाई भी करता नही, भाई पर विश्वास  
बहन पराई सी लगे, साली खासमखास !!

मंदिर में पूजा करें, घर में करे कलेश 
बापू तो बोझा लगे, पत्थर लगे गणेश !!

बचे कहाँ अब शेष हैं, दया, धर्म, ईमान 
पत्थर के भगवान् हैं, पत्थर दिल इंसान !!

फैला है पाखंड का, अन्धकार सब ओर 
पापी करते जागरण, मचा मचाकर शोर !!

-फीचर डेस्क